आने वाले समय में 16 की उम्र में ही आएगा बुढ़ापा ! . ब्रह्मवैवर्त पुराण में बताया गया है कि कलियुग में ऐसा समय भी आएगा जब इंसान की उम्र बहुत कम रह जाएगी,युवावस्था समाप्त हो जाएगी। इस पुराण में कलियुग में किस प्रकार का वातावरण रहेगा,इंसानों का जीवन कैसा रहेगा,स्त्री और पुरुष के बीच कैसे संबंध रहेंगे आदि बातों की भविष्यवाणी की गई है। यहां जानिए इस पुराण में कलियुग के लिए क्या-क्या भविष्यवाणी पहले से ही कर दी गई है... . इंसानों की उम्र हो जाएगी बहुत कम . कलियुग में इंसानों की उम्र बहुत कम हो जाएगी। स्त्री और पुरुष,दोनों ही रोगी और थोड़ी उम्र वाले हो जाएंगे। 16 वर्ष की आयु में ही लोगों के बाल पक जाएंगे और वे 20 वर्ष की आयु में ही वृद्ध हो जाएंगे। युवावस्था समाप्त हो जाएगी। यह बात सच भी प्रतीत होती है,क्योंकि प्राचीन काल में इंसानों की औसत उम्र करीब 100 वर्ष रहती थी। उस काल में 100 वर्ष से अधिक जीने वाले लोग भी हुआ करते थे,लेकिन आज के समय में इंसानों की औसत आयु बहुत कम (60-70 वर्ष) हो गई है। भविष्य में भी इंसानों की औसत उम्र में कमी आने की संभावनाएं काफी अधिक हैं,क्यो...
दुनिया चले ना श्री राम के बिना। राम जी चले ना हनुमान के बिना।। --हनुमान का अर्थ- हनुमान का एक अर्थ है निरहंकारी या अभिमानरहित। हनु का मतलब हनन करना और मान का मतलब अहंकार। अर्...
🪔 प्रस्तावना: गुरु उस दिव्य शक्ति का नाम है, जो हमारे भीतर की अज्ञानता को समाप्त कर ज्ञान, प्रेम और मुक्ति की ओर ले जाती है। इस युग में अवधूत शिवानंद जी जैसे दिव्य गुरु, शिवयोग के माध्यम से लाखों साधकों को चेतना और आत्मिक उपचार का मार्ग दिखा रहे हैं। उनकी पवित्र पादुकाओं को समर्पित यह स्तोत्र – "श्री गुरु पादुका स्तोत्रम्" – आदि शंकराचार्य द्वारा रचित है। यह स्तोत्र केवल स्तुति नहीं, एक साधना है, एक समर्पण है, एक आभार है। 🌸 श्री गुरु पादुका स्तोत्रम् (अवधूत शिवानंद जी को समर्पित) अनंत संसार समुद्र तार नौकायिताभ्यां गुरुभक्तिदाभ्यां। वैराग्य साम्राज्यद पूजनाभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥१॥ कवित्व वाराशि निशाकराभ्यां दौर्भाग्यदावांबुदमालिक्याभ्यां। दूरीकृतानम्र विपत्तिताभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥२॥ नता ययोः श्रीपतितां समीयुः कदाचिदप्याशु दरिद्रवर्याः। मूकाश्च वाचसपतितां हि ताभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥३॥ नाली कनी काशपदाहृताभ्यां नानाविमोहादिनिवारिकाभ्यां। नमज्जनाभीष्टततिप्रदाभ्यां नमो नमः श्री गुरु पादुकाभ्यां॥४॥ नृपालिमौलि ब्रज रत...
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